आरोप : समय पर स्कूल आने को कहा इसलिए शिक्षिकाओं ने फंसाया
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प्रधानपाठक द्वारा अश्लील हरकतों की शिकायत के बाद किया गया निलंबन का मामला उलझता जा रहा है।
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Publish Date: Thu, 27 Mar 2014 02:31:53 PM (IST)
Updated Date: Thu, 27 Mar 2014 02:38:07 PM (IST)

चारामा (निप्र)। ग्राम जेपरा के आवासपारा स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित नवीन प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक पर शाला की शिक्षिकाओं व रसोइयों द्वारा की गई अश्लील हरकतों की शिकायत के बाद किया गया निलंबन का मामला उलझता जा रहा है।
स्कूल समिति के पदाधिकारियों प्रधानपाठक पर लगाए गए आरोप को निराधार बताया है। वहीं प्रधानपाठक ने भी साजिश के तहत उन्हें फंसाने का आरोप लगाया है। स्कूल समिति व प्रधानपाठक के मुताबिक पढ़ाई कार्य में लापरवाही बरतने के कारण उक्त शिक्षिकाओं से डांट-फटकार की गई थी। साथ ही उन्हें रवैया बदलने की चेतावनी भी दी गई थी। इसका बदला उन्होंने झूठा आरोप लगाकर लिया।
इस मामले में प्रारंभिक जांच के बाद प्रधानपाठक को निलंबित कर दिया गया है।शाला की शिक्षिकाओं व महिला रसोइयों ने प्रधानपाठक पर दुर्व्यवहार व अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया था। मामला बीईओ से होते हुए थाने पहुंचा। शिक्षिकाओं के बयान के आधार पर प्रधानपाठक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उसी आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
प्रधानपाठक रोहित उइके शाला में 2003 से पदस्थ हैं। वहीं आरोप लगाने वाली दोनों शिक्षिकाओं में एक 2009 से व दूसरी 2010 से पदस्थ है।ग्राम के उपसंरपच लीलाधर दुबे, शिक्षा समिति के अध्यक्ष छत्रपाल धु्रव, सदस्य राजाराम साबे, गौतमराम निषाद ने बताया कि स्कूल की दोनों शिक्षिकाएं समय पर स्कूल नहीं आती थीं। इसके बारे में प्रधानपाठक ने शिक्षा समिति को बताया।
इस पर स्कूल समिति ने बैठक रखी। समिति के सदस्यों ने स्कूल के कक्षा पांचवीं के बच्चे को अपना नाम लिखने को कहा। बच्चों को अपना नाम तक लिखने तक नहीं आया। इस पर स्कूल समिति ने दोनों शिक्षिकाओं को कहा कि पूरा साल बीत गया लेकिन बच्चों को अपना नाम तक नहीं लिखने आता है। आप लोग कैसे शिक्षा दे रहे हैं। स्कूल में हमेशा समय पर नहीं आते।
समिति के सदस्यों ने शिक्षिकाओं को पढ़ाई में लापरवाही बरतने की बात कही। वहीं समिति ने निर्णय लिया कि अगर दोनों शिक्षिकाएं व प्रधानपाठक अगर समय पर स्कूल नहीं आतीं तो उन्हें अनुपस्थित मानकर उनका वेतन रोका जाये। इसके बाद से ही स्कूल में विवाद बढ़ता गया।
14 मार्च को शिक्षिकाओं द्वारा प्रधानपाठक के खिलाफ अश्लील हरकतें करने और अभद्रता की शिकायत सरपंच को लिखित में की गई। इस पर 15 मार्च को ग्राम पंचायत और स्कूल समिति ने प्रधानपाठक और दोनों शिक्षिकाओं के बीच बैठक रखकर बातचीत करनी चाही लेकिन शिक्षिकाओं की परीक्षा में ड्यूटी लगने के कारण वे बैठक में उपस्थित नहीं हो पाईं। इसके बाद होली का पर्व होने के कारण बैठक टल गई।
होली के बाद बैठक होनी थी लेकिन शिक्षिकाओं ने यह सोचा कि चार पांच दिन बीत जाने के बाद भी पंचायत कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, यह समझकर 20 मार्च को बीईओ से प्रधानपाठक की शिकायत कर दी। बीईओ ने शिकायत की जानकारी सहायक आयुक्त को दी। सहायक आयुक्त के आदेश पर बीईओ दो महिला कर्मचारियों के साथ स्कूल पहुंचे। शिकायत के आधार पर शिक्षिकाओं, रसोइयों और बच्चों के बयान लिये। उसी आधार पर उच्चाधिकारी के निर्देश पर हल्बा चौकी में प्रधानपाठक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस पर पुलिस जांच करने स्कूल पहुंची और बयान के आधार पर मामला दर्ज किया। इस दौरान दोनों रसोइयों ने बताया कि प्रधानपाठक पिछले एक वर्ष से उनके साथ अपशब्द का प्रयोग करते थे। शिक्षिकाओं ने बताया कि वे गाली-गलौच कर डांट फटकार करते थे।
समय देते तो शिकायत की जांच करते : सरपंच
सरपंच कुमारी बाई नेताम ने बताया कि प्रधानपाठक के व्यवहार की लिखित में शिकायत करने शिक्षिकाओं ने की थी। जांच के लिए बैठक रखी भी गई थी लेकिन शिक्षिकाओं के उपस्थित नहीं होने के कारण बैठक नहीं हो पाई। आगे बैठक होती तब तक शिक्षिकाओं ने शिकायत को आगे अधिकारियों को बढ़ा दिया। ग्राम पंचायत को निर्णय लेने या जांच करने का समय ही नहीं दिया। अगर समय देते तो शिकायत की जांच की जाती।
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