एफडी में भी जोखिम

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इस हकीकत का ध्यान हमेशा रखना चाहिए कि अधिक पैसा मुफ्त में नहीं आता।

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Publish Date: Sat, 21 Nov 2015 09:42:33 PM (IST)

Updated Date: Mon, 23 Nov 2015 09:11:15 AM (IST)

एफडी में भी जोखिम

‘मैं सबसे अच्छी डील के लिए भरसक मोल-भाव करता हूं।’

‘जीवनस्तर सुधारने के लिए मुझे ज्यादा आय की जरूरत है।’

‘मेरे पास दो नौकरियों के मौके हैं, कौन सी सबसे अच्छी होगी?’

मन हमेशा किसी न किसी चीज की तलाश में रहता है, सृजन करता है और उपलब्ध विकल्पों का मूल्यांकन करता है। यही क्षमता हमें खास बनाती है। लेकिन, हमारे आसपास हर क्षण ऐसी चीजें मौजूद होती हैं जो फैसले करने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। कई बार हम दूसरों से प्रभावित होकर ऐसे फैसले कर बैठते हैं जो वास्तव में हमारे हित में नहीं होते। दिलचस्प है कि कोई भी फैसला करते समय हमारे जेहन में हमेशा दो चीजें होती हैं, लालच और भय। लेकिन, यदि हम समझदारी से काम लें तो गलत फैसलों से बच सकते हैं।

कर्ज लेना

मान लीजिए, आप कर्ज लेना चाहते हैं। इस मामले में आपको सबसे पहले इस बात का गहरा विश्लेषण करना चाहिए कि आखिर कर्ज लेने की जरूरत क्यों है। इसके बाद यह तय करना होगा कि कर्ज कहां से उठाना है। यह फैसला मुख्य रूप से दो चीजों पर निर्भर करेगा, ब्याज की दर और डील का आकर्षण। ऐसे मामले में आप जितना संभव हो सके उतनी बचत करने की कोशिश करेंगे। आप शून्य प्रोसेसिंग शुल्क की उम्मीद करेंगे, सबसे कम ब्याज दर चाहेंगे और भुगतान की उदार शर्तें तलाशेंगे। जाहिर है, इस मामले में आप सबसे ज्यादा भय से प्रभावित हैं। आप कतई नहीं चाहेंगे कि केवल अच्छी डील न हो पाने की वजह से नुकसान उठाएं। इसके अलावा पेमेंट शिड्यूल पर भी नजर होती है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि ब्याज की लागत पर अध्यधिक ध्यान देने और भुगतान के नियमों को नजरअंदाज करने की स्थिति में ही गलती होने की गुंजाइश सबसे ज्यादा होती है।

निवेश करना

खुद को एक निवेशक के तौर पर देखिए। इस स्थिति में आप हमेशा निवेश के ऐसे मौके तलाशते हैं, जो कमाई के लिहाज से हैरत में डालने वाले हों। आप ज्यादा मुनाफा चाहते हैं, टैक्स बचाने की कोशिश करते हैं और साथ-साथ यह इत्मिनान भी चाहते हैं कि पूंजी सुरक्षित रहे। इस मामले में फैसले पर लालच का सबसे ज्यादा असर होता है। लेकिन, इस हकीकत का ध्यान हमेशा रखना चाहिए कि अधिक पैसा मुफ्त में नहीं आता।

निवेश के विकल्पों की तलाश

बदलते समय के साथ-साथ लोग यह हकीकत समझने लगे हैं कि वे पहले से पांच फुट पानी में हैं। यह ऐसा दौर है, जब बैंक जमा कराई गई रकम पर ज्यादा ब्याज नहीं देते, निवेशक ऐसी संपत्तियों में पैसा नहीं लगाना चाहते जिनमें अधिक जोखिम हो (मसलन, शेयर और रियल एस्टेट)। जाहिर है, निवेश की गई रकम से ज्यादा मुनाफा मुश्किल है। इन सभी चीजों पर गौर करने के बाद कंपनियों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम आकर्षक लगती हैं। जो लोग कम पूंजी और कम कमाई के जंजाल में फंसे हुए होते है, उनमें से कई कंपनियों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में पैसा लगाते हैं। यह बात सही है कि निवेश की ऐसी योजनाओं में ब्याज भुगतान और मूलधन वापसी को लेकर प्रतिबद्घता होती है, लेकिन इसे तोड़ा जा सकता है। कई बार जानबूझकर, लेकिन ज्यादातर मौकों पर अनजाने में।

वर्तमान संदर्भ में

प्रचलित ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था में क्रेडिट की समग्र स्थिति पर नजर डालने से लगता है कि निवेश की राह फिसलन भरी है। यदि आप सावधान नहीं हैं और उम्मीदों पर लगाम नहीं कसी है तो आपका लालच आपकी माली हालत पर भारी पड़ सकता है। रिजर्व बैंक ने इस साल नीतिगत ब्याज दरों में काफी कटौती की है। यह उदार मौद्रिक नीति का संकेत है। इस वजह से फिक्स्ड डिपॉजिट पर बतौर ब्याज दर होने वाली कमाई भी घटी है। खास तौर पर पिछले दो वर्षों के दौरान ब्याज दरें काफी कम हो गई हैं। ऐसे हालात में यदि आप बैंकों की एफडी में पैसा नहीं लगाना चाहते और कंपनियों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम्स में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको निवेश के इस साधन की बुनियादी चीजों पर अच्छी तरह गौर करने की जरूरत है।

ज्यादा जानकारी जुटाएं

किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में 3 साल की एफडी करने पर करीब 7-7.5 प्रतिशत ब्याज मिल सकता है। हो सकता है कि निजी क्षेत्र के बड़े बैंक 0.25-0.30 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज की पेशकश करें। भारत में कार्यरत विदेशी बैंक समान दरों पर जमा जुटाने में सक्षम है। अरबन को-ऑपरेटिव बैंक इन दिनों तीन साल की डिपॉजिट पर 8.25 प्रतिशत यानी ज्यादा आकर्षक ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं। लेकिन, यदि आप 30 प्रतिशत या 20 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आते हैं तो प्रभावी कमाई इससे भी कम ठहर सकती है। ऐसे में इस बात की तगड़ी संभावना बनती है कि लोग निवेश के दूसरे विकल्पों की तलाश करें।

कॉर्पोरेट एफडी

‘ए ए ए’ या समान रेटिंग्स वाली कंपनी एफडी में तीन साल के लिए पैसा लगाने पर करीब 9.25 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज मिलता है। लेकिन ‘बी बी बी-‘ और इससे कम रेटिंग्स वाली कंपनी एफडी कहीं ज्यादा 12.5 प्रतिशत तक ब्याज दर की पेशकश करती हैं। उनकी मंशा अधिक-से-अधिक निवेशकों को आकर्षित करना होता है। इसका मतलब है कि यदि तीन साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट करना है, तो राष्ट्रीयकृत बैंकों की स्कीम्स के मुकाबले 5 प्रतिशत तक ज्यादा कमाई करने के विकल्प मौजूद हैं।

कॉर्पोरेट एफडी में ये देखें

  • क्रेडिट प्रोफाइल
  • टैक्स चुकाने के बाद रिटर्न
  • ब्याज चुकौती के विकल्प
  • निवेश की अवधि
  • मैच्योरिटी से पहले निकासी

जब भी किसी कॉर्पोरेट एफडी में पैसा लगाने का फैसला करें, तो चयन करते समय ऊपर बताई गई चीजों पर जरूर गौर करें। लेकिन ध्यान रहे, मुनाफा और सुरक्षा केवल इन्हीं बातों पर निर्भर नहीं होती। किसी कंपनी की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम की क्रेडिट क्वालिटी और अन्य चीजों के बारे में इत्मिनान होने के बाद कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण करने की कोशिश भी करनी चाहिए।

इन चीजों पर गौर करें

  1. पिछली कुछ तिमाहियों में कंपनी को हुए मुनाफे पर नजर डालें। अधिक ऑपरेटिंग प्रॉफिट का मतलब होता है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस से पैसा आ रहा है।
  2. कंपनी की शुद्घ वैल्यू के मुकाबले कर्ज का बोझ कम होना चाहिए। यदि कंपनी पर ज्यादा कर्ज नहीं है तो इस बात की गुंजाइश ज्यादा बनती है कि वह समय पर कर्ज और ब्याज का भुगतान कर देगी।
  3. कार्यशील पूंजी की स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए। हो सकता है किसी कंपनी के पास संपत्तियों की कमी न हो। लेकिन, यदि उसे रोज के काम के लिए पैसे जुटाने में दिक्कत आ रही हो तो कंपनी परेशानी में पड़ सकती है। ऐसी कंपनियों की एफडी से दूर रहें।
  4. यह भी देखना होगा कि कंपनी में मालिकों की कितनी हिस्सेदारी है। यदि किसी कंपनी का प्रोमोटर ज्यादा ब्याज दर पर लोगों से पैसे जुटा रहा है, जबकि उसने बड़ी मात्रा में कंपनी की हिस्सेदारी पहले से गिरवी रखी हुई है, तो यह खतरे की घंटी है।

याद रखें: आपको ऐसी कंपनी की एफडी में पैसा लगाना चाहिए जो…

  • अच्छी क्रेडिट रेटिंग का फायदा उठा रही हो
  • मुख्य बिजनेस से तिमाही-दर-तिमाही ज्यादा कमाई हो रही हो
  • कर्ज का बोझ उतना ही हो, जिसे आसानी से चुकाया जा सके
  • कार्यशील पूंजी की दिक्कत न हो और प्रोमोटरों को पूंजी जुटाने के लिए अपनी हिस्सेदारी गिरवी न रखनी पड़ी हो।

थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकीन नहीं। कंपनियों की एफडी स्कीम में पैसा लगाकर अच्छी कमाई की जा सकती है। बस कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। ऐसा करके जोखिम कम किया जा सकता है। यदि इसके बाद भी संदेह बाकी हो, तो यह अच्छी बात है। पता करें कि कंपनी ने अपना लोन चुकाने में डिफॉल्ट तो नहीं किया है। किसी एक मानक पर भी यदि कोई कंपनी खरी नहीं उतरती तो उसकी एफडी में पैसा नहीं लगाना चाहिए।

एमटेक ऑटो का मामला

यह आंखें खोलने वाला मामला है। घाटे की आशंका और ज्यादा कमाई के लालच से जुड़ा यह सबसे नवीनतम और शानदार उदाहण है। दरअसल, थोड़ी कमाई बढ़ाने के लिए बड़ा जोखिम उठाने का कोई मतलब नहीं होता। ऐसी बेवकूफी से बचना चाहिए।

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