छत्‍तीसगढ़ के सरपंच का दिल्ली में अनोखा प्रदर्शन, गांव में सड़क निर्माण की मांग लेकर केंद्रीय मंत्री गडकरी के आवास तक लोटते पहुंचा सरपंच

छत्‍तीसगढ़ के सरपंच का दिल्ली में अनोखा प्रदर्शन, गांव में सड़क निर्माण की मांग लेकर केंद्रीय मंत्री गडकरी के आवास तक लोटते पहुंचा सरपंच


छत्‍तीसगढ़ के महासमुंद जिले के रामाडबरी से बावनकेरा तक दो किमी पक्की सड़क के लिए सत्र 2023 में दो करोड़ 53 लाख 71 हजार रूपये की राशि स्वीकृत होने बावजूद अब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जिससे सड़क निर्माण नहीं हो पाया है।

By Ashutosh Kumar Sharma

Publish Date: Tue, 23 Jul 2024 03:12:00 PM (IST)

Updated Date: Tue, 23 Jul 2024 03:12:00 PM (IST)

छत्‍तीसगढ़ के सरपंच का दिल्ली में अनोखा प्रदर्शन, गांव में सड़क निर्माण की मांग लेकर केंद्रीय मंत्री गडकरी के आवास तक लोटते पहुंचा सरपंच
मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर सड़क पर लेटा सरपंच शत्रुहन चेलक

HighLights

  1. रामाडबरी से बावनकेरा तक दो किमी सड़क बनाने की मांग l
  2. ग्राम पंचायत बम्बूरडीह के सरपंच चेलक का दिल्ली में विरोधl
  3. पक्की सड़क नहीं होने से बारिश में लोगों को होती है परेशानी।

नईदुनिया प्रतिनिधि। महासमुंद। छत्‍तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बम्बूरडीह सरपंच ने दिल्ली में सड़क पर लोटकर प्रदर्शन किया। सरपंच का प्रदर्शन नेशनल मीडिया के संज्ञान में आया। बाद शत्रुहन चेलक की पड़ताल शुरू हुई।

गांव में महज दो किमी सड़क निर्माण की मांग को लेकर महासमुंद जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बम्बूरडीह के सरपंच शत्रुहन चेलक ने दिल्ली पहुंचकर सड़क पर प्रदर्शन किया।

सरपंच चेलक ने ग्राम रामाडबरी से बावनकेरा तक की दो किमी सड़क के शीघ्र निर्माण के लिए दिल्ली में केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सरकारी आवास के बाहर सड़क पर लोटकर अपनी मांग रखी। उन्होंने इस प्रदर्शन से मीडिया का ध्यान खींचा।

ज्ञात हो कि रामाडबरी से बावनकेरा तक दो किमी पक्की सड़क के लिए सत्र 2023 में दो करोड़ 53 लाख 71 हजार रूपये की राशि स्वीकृत होने बावजूद अब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जिससे सड़क निर्माण नहीं हो पाया है।

बम्बूरडीह पंचायत का आश्रित ग्राम रामाडबरी बारिश के दिनों में टापू बन जाता है। पक्की सड़क नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में आवागमन बहुत कठिनाई होती है। स्कूल, मेडिकल इमरजेंसी के लिए जद्दोजहद करना पड़ता है। गांव तक स्कूल में शिक्षक नहीं पहुंच पाते हैं।



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