दूरदर्शन पर गूंजेगी शहर की आवाज

दूरदर्शन पर गूंजेगी शहर की आवाज


– युवा शायर अतुल के संचालन में होगा डीडी मध्य प्रदेश का यह विशेष कार्यक्रम – 15 जुलाई को सुबह 8 बजे होगा ‘काव्यांजलि’ का प्रसारण आगामी 15 जुलाई को दूरदर्शन मध्य प्रदेश पर युवा शायर अतुल कन्नाौजवी की निजामत में काव्यांजलि नाम के साहित्यिक कार्यक्रम का प्रसारण होगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय शायरा ज्योति आजाद खत्री व युवा शायर सतीश दुबे ‘सत्यार्थ’ अपना कला

By Nai Dunia News Network

Edited By: Nai Dunia News Network

Publish Date: Tue, 14 Jul 2020 04:03:54 AM (IST)

Updated Date: Tue, 14 Jul 2020 04:03:54 AM (IST)

दूरदर्शन पर गूंजेगी शहर की आवाज

– युवा शायर अतुल के संचालन में होगा डीडी मध्य प्रदेश का यह विशेष कार्यक्रम

– 15 जुलाई को सुबह 8 बजे होगा ‘काव्यांजलि’ का प्रसारण

आगामी 15 जुलाई को दूरदर्शन मध्य प्रदेश पर युवा शायर अतुल कन्नाौजवी की निजामत में काव्यांजलि नाम के साहित्यिक कार्यक्रम का प्रसारण होगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय शायरा ज्योति आजाद खत्री व युवा शायर सतीश दुबे ‘सत्यार्थ’ अपना कलाम पेश करते दिखेंगे। अतुल ने बातचीत में बताया कि दूरदर्शन मध्य प्रदेश पर काव्यांजलि नाम का यह साहित्यिक कार्यक्रम 15 जुलाई को सुबह 8 बजे प्रसारित होगा। बीते दिनों इस कार्यक्रम की शूटिंग हो चुकी है, जिसमें बेहतरीन गीत, गजल व शायरी सुनने को मिलेगी।

‘कविता रूह में बसी होनी चाहिए’

अतुल कहते हैं कि कविता ओढ़ी हुई नहीं होनी चाहिए। विषय वही हैं, जो हजारों साल पहले थे, लेकिन उन्हें कविता में अगर अलग और नए अंदाज में ढाला जाए तो ही दिल से वाह निकलती है। लफ्जों में आग छुपाने का फन हर किसी को नहीं आ सकता। आप अंदर से कवि या शायर होने चाहिए, तभी बात बन सकती है। किताबें पढ़कर, किसी की नकल करके या किसी को उस्ताद बना लेने से कविता शायरी नहीं आ सकती। हां, तुकबंदी जरूर आ सकती है और उस तुकबंदी पर आपके मित्र मंडली के सदस्य सोशल मीडिया की साइट पर लाइक या कमेंट्स की झड़ी लगा सकते हैं, जिसकी बदौलत आपमें कवि या शायर होने का मुगालता पैदा हो सकता है।

सोशल मीडिया ने अच्छा भी किया है और बुरा भी

अतुल कहते हैं कि सोशल मीडिया ने कविता-शायरी को फायदा पहुंचाने के साथ नुकसान भी दिया है। फायदा यह कि पहले बहुत से लोग जो अच्छी कविता या शायरी करते थे, बिना अपनी पहचान बनाए गुमनामी में खो जाते थे। किसी की किताब छप गई तो और बात, वरना उनकी कविता गली मोहल्ले से बाहर नहीं निकल पाती थी। अब अच्छी कविता लिखने वाले सोशल मीडिया की बदौलत अपनी पुख्ता पहचान बनाने में कामयाब हो रहे हैं, उनकी रचनाएं गली, मोहल्ले, शहर से बाहर या सरहद पार भी पहुंच रही हैं। वहीं नुकसान ये हुआ है कि बहुत से लोग जिनका कविता से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था, वे लोग भी फटाफट नाम कमाने के चक्कर में कविता-शायरी का सरेआम बेड़ा गर्क कर रहे हैं। अतुल ने कहा कि शायरी फकत काफिया पैमाइश, रदीफ और बहर का ही नाम नहीं है। ये अपने जज्बात को इजहार करने का अनूठा फन है। ये फन जितना आसान नजर आता है, उतना होता नहीं। तभी तो बहुत कम लोग हैं, जो इस भीड़ में अपनी पहचान बना पा रहे हैं। विषय वही हैं, जो हजारों साल पहले थे, लेकिन उन्हें शायरी में अगर अलग और नए अंदाज में ढाला जाए तो दिल से वाह निकलती है।



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