फर्जीवाड़े से मुक्त होगी रियल एस्टेट इंडस्ट्री

फर्जीवाड़े से मुक्त होगी रियल एस्टेट इंडस्ट्री


रियल एस्टेट रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट एक्ट पूरी इंडस्ट्री की सूरत बदलने की क्षमता रखता है।

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Publish Date: Sat, 11 Jun 2016 07:41:22 PM (IST)

Updated Date: Tue, 21 Jun 2016 11:08:23 AM (IST)

फर्जीवाड़े से मुक्त होगी रियल एस्टेट इंडस्ट्री

विपिन भट्ट, रियल एस्टेट एक्सपर्ट

पिछले एक साल में नेशनल कंज्यूमर कमीशन ने कई बड़े फैसले किए हैं, जिन्हें घर खरीदने वाले परेशान लोगों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। पजेशन में देरी, खराब कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, मनमाने तरीके से प्लान में बदलाव, ऐसी कुछ ऐसी शिकायतें हैं, जिससे हर दूसरा घर खरीदार को जूझना पड़ रहा है। न सिर्फ छोटे-मोटे और गुमनाम बिल्डर्स, बल्कि देश के जाने माने रियल एस्टेट ब्रांड के खिलाफ भी शिकायतों का अंबार है। ऐसे में घर खरीदारों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है ‘रियल एस्टेट रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट एक्ट 2016’। यदि यह कानून ठीक से लागू हुआ तो देश में रियल एस्टेट इंडस्ट्री की सूरत ही बदल जाएगी। 1 मई को इस नए कानून का नोटिफिकेशन जारी हो गया है और 31 अक्टूबर तक केंद्र और राज्य सरकारों को इसे लागू करने के लिए नियम तैयार कर लेने होंगे।

हर राज्य में रेगुलेटरी अथॉरिटी

नए कानून के तहत हर राज्य में ‘रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी’ का गठन किया जाएगा। किसी भी नए प्रोजेक्ट को लॉन्च करने से पहले डेवलपर को रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास उसे रजिस्टर करना होगा। इसके बाद ही विज्ञापन, बुकिंग और बिक्री प्रक्रिया की शुरुआत हो सकेगी। रजिस्ट्रेशन के बाद प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां रेगुलेटर की वेबसाइट पर डाली जाएगी, जिन्हें मकान खरीदार देख सकते हैं। इतना ही नहीं, रेगुलेटर कानून लागू होने के बाद ऐसे प्रोजेक्ट, जिन्हें उस वक्त तक पूरा होने का सर्टिफिकेट नहीं मिला है, वे भी इसके दायरे में आ जाएंगे। कानून लागू होने के एक साल के भीतर सभी राज्यों को रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन करना ही होगा।

झूठे विज्ञापन नहीं चलेंगे

अक्सर मकान खरीदने वालों को शिकायत रहती है कि बिल्डर विज्ञापन में तो बहुत अच्छी-अच्छी बाते करते हैं, लेकिन असल प्रोजेक्ट में वैसा कुछ नहीं होता है। चमकीले शो फ्लैट को देखकर मकान खरीदने वाले भी बाद में इसी तरह शिकायत करते मिलते हैं। कई बिल्डर के विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगेगी और बिल्डर बिना रेगुलेटर से पास कराए विज्ञापन नहीं दे सकेंगे।

अब सिर्फ कार्पेट एरिया

अब तक बिल्ट अप और सुपर बिल्ट अप एरिया के नाम पर डेवलपर ग्राहकों को गुमराह किया करते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। अब सिर्फ कार्पेट एरिया पर ही घरों की बिक्री होगी। कार्पेट एरिया मतलब वो जगह, जो आपके घर की चार दिवारी के अंदर होगा। इसमें गार्डन, प्ले एरिया, लिफ्ट, लॉबी जैसे कॉमन एरिया शामिल नहीं होगे।

हर प्रोजेक्ट का अलग अकाउंट

अक्सर कई प्रोजेक्ट इसलिए अटक जाते हैं क्योंकि बिल्डर उन प्रोजेक्ट के लिए लिया हुआ पैसा दूसरे प्रोजेक्ट या जमीन खरीदने में खर्च कर देते हैं। अब इस पर लगाम लगेगी। बिल्डरों को हर प्रोजेक्ट के लिए एक अलग अकाउंट बनाना होगा, जिसमें बिक्री के जरिए जमा रकम का कम से कम 70 फीसदी हमेशा रखना होगा। यह प्रावधान लागू होने के बाद पैसों की तंगी के चलते प्रोजेक्ट अटकने के मामले कम होने की उम्मीद की जा सकती है।

अब नहीं बदलेगा प्लान

बिल्डरों के खिलाफ जो शिकायतें मिलती हैं, उनमें ऐसी शिकायतों का प्रतिशत ज्यादा है, जहां मकान खरीदार को बिना बताए प्लान में बदलाव कर दिए जाते हैं। ऐसे में कई बार बिल्डर अपनी मर्जी से घर का एरिया बढ़ा देते हैं और खरीदार से अतिरिक्त रकम की मांग कर डालते हैं। लेकिन अब ऐसा करने के लिए बिल्डर को कम से कम दो तिहाई खरीदारों से मंजूरी लेनी होगी। ऐसा न होने पर बिल्डर प्लान, डिजाइन, साइज और सुविधाओं में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकेगा।

एडवांस की सीमा होगी तय

अक्सर लोग बिल्डर के झांसे में आकर उन्हें प्रोजेक्ट का काम शुरू होने से पहले ही मोटी रकम का भुगतान कर देते हैं। फिर, बाद में किसी कारण से जब प्रोजेक्ट में देरी होती हो तो ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। लेकिन, रेगुलेटर या नियामक के अस्तित्व में आने के बाद बिल्डर ग्राहकों से बिना एग्रीमेंट किए 10 फीसदी से ज्यादा एडवांस नहीं ले सकेंगे।

मकान पर मिलेगी वारंटी

रियल एस्टेट रेगुलेटर आने के बाद मकान खरीदारों को एक बड़ा फायदा होने वाला है। अब उन्हें टीवी, फ्रिज और मोबाइल फोन की तरह मकान के लिए भी वारंटी मिलेगी। इसके तहत बिल्डर को पजेशन देने के पांच साल के अंदर मकान में किसी भी तरह के कंस्ट्रक्शन डिफेक्ट, फ्लोरिंग और इलेक्ट्रिकल आदि में खराबी आने पर उसकी मरम्मत करके देनी होगी। इसके लिए बिल्डर मकान खरीदार से किसी भी तरह का चार्ज नहीं ले सकेगा। इतना ही नहीं बिल्डर को ग्राहक की शिकायत का निपटारा 30 दिन के भीतर करना होगा। ऐसा न करने पर ग्राहक नियामक से बिल्डर की शिकायत भी कर सकता है।

नहीं चलेगा भेदभाव

रियल एस्टेट रेगुलेटर आने के बाद अब बिल्डर अपनी मनमर्जी का एग्रीमेंट नहीं बना सकेंगे। आमतौर पर बिल्डर एग्रीमेंट में ऐसी शर्तें रखते हैें, जो उनके फायदे की होती हैं। सबसे बड़ा अंतर आएगा प्रोजेक्ट लेट होने पर मिलने वाले मुआवजे पर। अक्सर बिल्डर ग्राहक की तरफ से पेमेंट में देरी होने पर बड़ी ऊंची दर पर पेनाल्टी और ब्याज लगाते हैं, लेकिन खुद की तरफ से प्रोजेक्ट लेट होने पर मामूली सी पेनाल्टी दी जाती है। नए कानून के मुताबिक अब दोनों में से किसी के भी लेट होने पर पेनल्टी की रकम या दर समान होगी।

कहां होगी सुनवाई

मौजूदा व्यवस्था में बिल्डर से परेशान ग्राहक कंज्यूमर फोरम जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लेकिन, रियल एस्टेट रेगुलेटर बनने के बाद हर राज्य में शिकायत के लिए रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। ट्रिब्यूनल के पास किसी सिविल कोर्ट जितने अधिकार होंगे। इस अपीलेट ट्रिब्यूनल में मामला दायर होने के 60 दिन के अंदर फैसला मिल जाएगा। अपीलेट ट्रिब्यूनल के फैसले को हाईकोर्ट में ही चुनौती दी जा सकेगी।

बदमाशी की मिलेगी सजा

रियल एस्टेट रेगुलेटर आने के बाद ऐसे बिल्डरों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी होने वाली है, जो अपने ग्राहकों को लेकर गंभीर नहीं हैं। रियल एस्टेट रेगुलटर बिल में गड़बड़ी करने वाले बिल्डरों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। किसी तरह की शिकायत मिलने पर या रेगुलेटर की तरफ से तय की गई गाइडलाइन का पालन न करने की स्थिति में बिल्डरों को प्रोजेक्ट की लागत का 10 फीसदी तक की पेनल्टी लग सकती है। इतना ही नहीं रेगुलेटर का आदेश न मानने पर बिल्डर को पेनल्टी के साथ-साथ 3 साल की जेल भी हो सकती है।

अधिकारसंपन्न नियामक

रियल एस्टेट नियामक न सिर्फ बिल्डरों पर निगरानी रखेगा, बल्कि वह राज्य सरकारों को सुझाव देने का भी काम करेगा। प्रोजेक्ट को मिलने वाली मंजूरी के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस और प्रोजेक्ट को मंजूरी देने वाली अथॉरिटी के खिलाफ किसी तरह की शिकायत दर्ज कराने के लिए रिड्रेसल सिस्टम जैसी सिफारिशें भी रेगुलेटर कर पाएगा।



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