महासमुंद के राजस्व न्यायालय में नायब तहसीलदार के साथ मारपीट, पैसे लेकर काम करने का आरोप
महासमुंद जिले के झलप में स्थित उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार के साथ उन्हीं के राजस्व न्यायालय में मारपीट की घटना घटित हुई है। नायब तहसीलदार युवराज साहू और कुलप्रीत सिंह के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और बातचीत के दौरान कुलप्रीत सिंह ने मारपीट की घटना को अंजाम दे दिया।
By Ashutosh Kumar Sharma
Publish Date: Tue, 09 Jul 2024 12:19:17 PM (IST)
Updated Date: Tue, 09 Jul 2024 12:19:17 PM (IST)
HighLights
- मारपीट करने वाले आरोपित पर थाने में विभिन्न धारा के तहत मामला दर्ज
- नायब तहसीलदार और कुलप्रीत सिंह के बीच मारपीट का वीडियो वायरल
- पटवारी, आरआई, साथी कर्मचारी तहसीलदार के समर्थन में पहुंचे थाने
नईदुनिया न्यूज़। महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के झलप स्थित राजस्व कार्यालय में नायब तहसीलदार से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। जहां उनसे उन्हीं के राजस्व कार्यालय में मारपीट हुई है। जिसकी सूचना पर पटेवा थाने में दी गई। जिस पर आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार जिले के झलप में स्थित उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार युवराज साहू के साथ उन्हीं के राजस्व न्यायालय में मारपीट की घटना घटित हुई है। नायब तहसीलदार युवराज साहू और कुलप्रीत सिंह के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और बातचीत के दौरान कुलप्रीत सिंह ने मारपीट की घटना को अंजाम दे दिया। घटना से आक्रोशित राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारियों ने दर्ज कराई रिपोर्ट है।
घटना के बाद रायपुर संभाग के बहुत से जिलों के पटवारी, आरआई, नायब तहसीलदार और तहसीलदार पटेवा थाना पहुंचे। जहां उन्होंने इस मामले की जानकारी पुलिस थाने में दर्ज कराई। जिस पर पटेवा थाने में आरोपित कुलप्रीत के खिलाफ बीएनएस के विभिन्न धारा के तहत मामला दर्ज करते हुए आरोपित को रिमांड में लिया है।
वीडियो हुआ वायरल
इधर विवाद का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें आरोपित कुलप्रीत, नायब तहसीलदार पर उन्हें 420 कहने की बात कहने पर नाराज हो रहा है और नायब तहसीलदार पर पैसे लेकर काम करने का आरोप लगाता दिख रहा है। हालांकि नईदुनिया वायरल वीडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं करता।
वजह नहीं आई सामने
कुलप्रीत क्यों नायब तहसीलदार के विरुद्ध गाली गलौज, मारपीट पर उतारू हुआ, नायब तहसीलदार ने आखिर ऐसा क्या किया जिसकी वजह से आवेदक को ऐसा करना पड़ा, इसकी वजह सामने नहीं आई। यह गंभीर जांच का विषय है।