Jagannath Prabhu ki Kahani: गधे पर बैठने वाला था भक्त… इससे पहले मंदिर से बाहर आ गए भगवान जगन्‍नाथ, विरोधी को मजा चखाया

Jagannath Prabhu ki Kahani: गधे पर बैठने वाला था भक्त… इससे पहले मंदिर से बाहर आ गए भगवान जगन्‍नाथ, विरोधी को मजा चखाया


जिस तरह भक्‍त अपने भगवान को पूजते हैं, उसी तरह भगवान भी अपने भक्तों को ध्यान रखते हैं। भगवान अपने भक्तों की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आने देते और उसे बचाने के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो जाते हैं। काशी और जगन्नाथपुरी से जुड़ी एक ऐसी ही पौराणिक कथा आपको बताने जा रहे हैं।

By Bharat Mandhanya

Publish Date: Sat, 27 Jul 2024 02:32:23 PM (IST)

Updated Date: Sun, 28 Jul 2024 09:54:01 AM (IST)

Jagannath Prabhu ki Kahani: गधे पर बैठने वाला था भक्त... इससे पहले मंदिर से बाहर आ गए भगवान जगन्‍नाथ, विरोधी को मजा चखाया
ओडिशा के पुरी में स्थित है जगन्‍नाथ मंदिर।

HighLights

  1. भगवान जगन्‍नाथ ने भक्त के लिए किया था शास्त्रार्थ
  2. भगवान ने भक्त के प्रतिद्वंदी को शास्त्रार्थ में हराया था
  3. काशी के विद्वान ने भक्त को दी थी शास्त्रार्थ की चुनौती

धर्म डेस्क, इंदौर Jagannath Prabhi ki Kahani। भगवान अपने भक्तों को बचाने के लिए किसी भी रूप में आते हैं। इसको लेकर कई पौराणिक कथाएं भी मिलती हैं। एक ऐसी ही पौराणिक कथा आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जहां अपने भक्त को बचाने के लिए भगवान जगन्‍नाथ खुद मंदिर से बाहर आ गए थे।

कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय के अनुसार, एक समय काशी में बहुत बड़े विद्वान हुआ करते थे। वे जहां भी जाते अन्य विद्वानों को शास्त्रार्थ की चुनौती देते थे। इसी बीच एक बार उन्हें काशी के किसी विद्वान ने जगन्नाथ पुरी में रहने वाले माधव दास को शास्त्रार्थ में हराने की चुनौती दे डाली। साथ ही कहा कि हराने के बाद भोज पत्र में उनसे लिखवा कर लाना कि माधवदास तुमसे हार गए और नीचे उनका हस्ताक्षर होना चाहिए।

naidunia_image

माधवदास ने मान ली हार

कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय बताते हैं कि इस चुनौती के बाद वह विद्वान माधवदास से शास्त्रार्थ के लिए काशी से पैदल चलकर जगन्‍नाथपुरी पहुंच गए। माधव दास ने जैसे देखा कोई परम विद्वान आया है, तो उन्होंने तुरंत दंडवत प्रणाम किया। इसके बाद विद्वान ने माधव दास को शास्त्रार्थ की चुनौती थी। माधव दास ने उनसे कहा कि आप शास्त्रार्थ न करें, मैं पहले ही हार चुका है।

इसके बाद विद्वान ने हारने की बाद भोजपत्र पर लिखने की बात कही। विद्वान के कहे अनुसार माधवदास ने भोजपत्र पर लिखकर दे दिया कि वे विद्वान से हार गए। आज के बाद वे कभी भी जगन्नाथपुरी आएंगे तो उनकी पूरी सेवा की जिम्मेदारी मेरी होगी।

naidunia_image

फिर हुआ ये चमत्कार

जब विद्वान ने यह भोजपत्र काशी के दूसरे विद्वान को दिखाया तो भोजपत्र में पूरा लेख ही बदल गया। उसमें लिखा था, ये अमुक नाम के व्यक्ति काशी से आज जगन्नाथपुरी आये। उन्होंने आकर के शास्त्रार्थ किया और शास्त्रार्थ में मुझसे बुरी तरह हार गए। आज के बाद कभी भी जगन्नाथपुरी आएंगे तो मुझे प्रणाम करेंगे और मेरी सेवा करेंगे। काशी से मेरे लिए बहुत सारी सेवा लेकर आएंगे।

यह पढ़ने के बाद विद्वान दोबारा माधवदास के पास पहुंचे और शास्त्रार्थ की चुनौती दी, लेकिन माधव दास ने फिर से अपनी हार स्‍वीकार कर ली। तब विद्वान ने उनसे कहा कि अब तुम्‍हे गधे पर बैठकर और मुंह पर कालिख पोतकर पूरे क्षेत्र का चक्‍कर लगाना होगा और कहना होगा मैं विद्वान से हार गया।

माधवदास ने विद्वान की इस चुनौती को भी स्वीकार कर लिया और कहा कि मैं जगन्नाथ भगवान के दर्शन करने जा रहा हूं, तब तक आप गधे का प्रबंध कर लीजिए और इतना कहकर वे मंदिर चले गए और विद्वान गधे की तलाश में निकल गए।

naidunia_image

हुआ ये चमत्‍कार

जब माधव दास मंदिर में थे, तब भगवान जगन्‍नाथ उनका रूप धारण कर मंदिर से बाहर आए और विद्वान को ही शास्त्रार्थ की चुनौती दी। इसके बाद विद्वान को बुरी तरह हराकर दोबारा मंदिर लौट गए। साथ ही विद्वान से कहा कि अब वे गधे पर बैठकर घूमें और हल्ला करें कि वे माधवदास से शास्त्रार्थ में हार गए हैं।

जब माधवदास मंदिर से बाहर आए तो देखा कि विद्वान गधे पर घूम रहे हैं, जिसे देख उन्‍हें हैरानी हुई। साथ ही यह समझने में भी देर न लगी कि यह काम भगवान जगन्‍नाथ का है। इधर, माधवदास को देखते ही उस विद्वान ने भी उनके हाथ जोड़ लिए और दोबारा काशी लौट गए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *